
श्रीगंगानगर। (राकेश घिंटाला)
बच्चों में होने वाली एएफपी, मीजल्स, रुबेला, डिप्थीरिया, परट्यूसिस और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ाने और त्वरित कार्रवाई करने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें टीकाकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस मौके पर सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला व आरसीएचओ डॉ. मुकेश मेहता सहित सभी बीसीएमओ, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ एवं सीएचसी तथा पीएचसी प्रभारी अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यशाला में मुख्यत: बच्चों में जानलेवा रोग से संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को एएफपी, मीजल्स, रुबेला, डिप्थीरिया, परट्यूसिस और नवजात टिटनेस सर्विलेंस संबंधित बीमारियों के सर्विलेंस के लिए संभावित केस चिन्हीकरण, सैंपल संग्रहीकरण, रोग प्रभावित क्षेत्र के सर्वेक्षण मय नियंत्रण एवं एईएफआई सर्विलांस (टीकाकरण पश्चात प्रतिकूल प्रभाव) एवं नियमित टीकाकरण के गुणवत्तापूर्ण संचालन के संबंध में की जाने वाली कार्रवाई तथा फॉलोअप को गंभीरता से लिए जाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा नियमित टीकाकरण की माइक्रोप्लानिंग पर भी चर्चा की गई। डबल्यूएचओ प्रतिनिधि डॉ. अनुरोध तिवारी ने चिकित्सा अधिकारियों को पांचों वीपीडी बीमारियों के संबंध में प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार पूर्वक जानकारी दी। सीएमएचओ डॉ. सिंगला ने कहा कि जिले में टीकाकरण को लेकर बेहतरीन कार्य एवं मानिटरिंग की जा रही है। फिर भी हमें इन पांचों बीमारियों एवं नियमित टीकाकरण के संबंध में विशेष एहतियात बरतनी चाहिए एवं रिपोर्टिंग भी नियमानुसार संबंधित सॉफ्टवेयर में करते हुए निदेशालय भिजवानी चाहिए। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज ने बच्चों में होने वाले गंभीर रोगों से ग्रसित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के बारे में उपस्थित चिकित्सा अधिकारीयों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।






